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India-Germany ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा बयान जारी कर साझा सुरक्षा रणनीति बनाई

Satyakhabarindia

गुजरात के गांधीनगर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने दोनों देशों के संबंधों को एक नई दिशा दी है। यह जर्मन चांसलर की भारत की पहली आधिकारिक यात्रा है, जो राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने और रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे होने के खास मौके पर हुई। इस बैठक में दोनों नेताओं ने भारत-जर्मनी सहयोग को और मजबूत करने का संकल्प लिया। खासकर रक्षा, अर्थव्यवस्था, तकनीक और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान कहा कि भारत और जर्मनी के बीच की साझेदारी सीमित नहीं होगी बल्कि इसे ‘लिमिटलेस’ बनाया जाएगा, जिसमें रक्षा, स्पेस और अत्याधुनिक तकनीक भी शामिल हैं।

रक्षा और तकनीकी क्षेत्र में गहरा सहयोग

दोनों देशों ने अपने साझा हितों को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। इनमें रक्षा के क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग से लेकर आर्थिक विकास और तकनीकी नवाचार तक कई पहल शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्थिक सहयोग का दायरा इतना व्यापक होगा कि इससे न केवल दोनों देशों को फायदा होगा बल्कि वैश्विक स्तर पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में भी दोनो देशों ने एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करने का आश्वासन दिया। इससे युवाओं को नई तकनीकों में प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे। इस साझेदारी से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और नवाचार के नए द्वार खुलेंगे।

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आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त प्रतिबद्धता

दोनों नेताओं ने आतंकवाद और उग्रवाद के सभी रूपों की कड़ी निंदा की। उन्होंने विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद को लेकर चिंता जताई और इसे वैश्विक शांति के लिए खतरा बताया। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम और दिल्ली में हुए आतंकवादी हमलों की निंदा करते हुए उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को मजबूत करने का संकल्प लिया। इस दिशा में संयुक्त राष्ट्र 1267 प्रतिबंध समिति के तहत सूचीबद्ध आतंकवादियों और संगठनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर सहमति बनी। दोनों देशों ने आतंकवाद के ठिकानों और वित्तीय नेटवर्क को खत्म करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने की भी अपील की। इस संदर्भ में आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह की प्रगति को भी सराहा गया।

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इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग और प्रतिबद्धता

वार्ता में भारत और जर्मनी ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को लेकर भी महत्वपूर्ण बात की। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में स्वतंत्रता, खुलेपन और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के पालन की प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस संदर्भ में एक नए द्विपक्षीय इंडो-पैसिफिक परामर्श तंत्र की घोषणा भी की गई। भारत ने जर्मनी की इस क्षेत्र में बढ़ती भागीदारी का स्वागत किया, जो इंडो-पैसिफिक महासागर पहल (IPOI) के तहत क्षमता निर्माण और संसाधन साझा करने के स्तंभ के माध्यम से सामने आ रही है। यह पहल दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करेगी और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

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